बुधवार, 20 अप्रैल 2011

आंदोलन या अन्ना 'डोलन'!

अन्ना हजारे का आंदोलन क्या बाबा रामदेव द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन की धार कुंद करने के लिए कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार द्वारा कराया गया नाटक था? जन लोकपाल प्रारूपण समिति की पहली बैठक में इस आंदोलन के अगुवा अन्ना हजारे का सुर बदलने से यह चर्चा आम हो गई है। हालांकि प्रारूपण समिति में सिविल सोसाइटी के नुमाइंदे इस बात से इनकार करते हैं। समिति के सदस्य व कर्नाटक के लोकायुक्त संतोष हेगड़े ने कहा कि हम जन लोकपाल विधेयक को पारित कराने का प्रयास कर सकते हैं, लेकिन अंतिम फैसला तो केंद्र सरकार को ही लेना है। क्योंकि आम जनता ने ही सांसदों को विश्वास के साथ चुनकर भेजा है। अगर संसद में विधेयक को नकार दिया जाता है तो उसके बाद कुछ नहीं किया जा सकता। यह समिति की पहली बैठक थी। इसमें यह नहीं कहा जा सकता है कि सिविल सोसाइटी के लोग झुक गए। जबकि उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता नीरज मिश्रा कहते हैं, इस आंदोलन की दिशा पर पहले से ही संदेह था। किसी भी कानून के प्रारूपण के लिए विधिक प्रक्रिया होती है। जनलोकपाल आंदोलन चलाने वाले केवल दस लोगों की समिति बनाकर इतना अहम कानून बनाने की बात कर रहे हैं। पहले इन लोगों ने केंद्र सरकार के समक्ष बैठक की कार्यवाही की वीडियो तैयार न कराने की जिद के आगे झुके और अब केंद्र सरकार कह रही है कि बैठक की कार्यवाही का ऑडियो तैयार किया गया है, लेकिन उसे जनता के सामने सरकार दिखाएगी। दरअसल ताजा घटनाक्रम से लगता है कि केंद्र सरकार ने प्रायोजित ढंग से अन्ना के इस आंदोलन को करवाया। भारत स्वाभिमान यात्रा के जरिए बाबा रामदेव गांव-गांव जाकर भ्रष्टाचार के खिलाफ अलख जगा रहे हैं। रामदेव ने बयान भी दिया था कि जनता को मिस्र के लोगों की तरह दिल्ली का घेराव करना चाहिए। शायद कांग्रेस इससे डर गई और उसने रामदेव के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए प्रायोजित ढंग से जन लोकपाल विधेयक के बारे में आंदोलन शुरू करवाया। सिविल सोसाइटी के ही रमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता संदीप पांडे इससे बिलकुल इनकार करते हैं। पांडे ने कहा कि कानून तो विधायिका ही बनाएगी। हमने जो मसौदा दिया है उसमें फेरबदल किया जा सकता है। हमारी मांग सिर्फ इतनी थी कि जो सुझाव जनता की तरफ से दिया जाए उसे लोकपाल विधेयक में शामिल किया जाए। यह पूछे जाने पर कि संसद में अस्वीकार करने पर क्या करेंगे पांडे ने कहा कि हम फिर से आंदोलन शुरू करेंगे।

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