मंगलवार, 28 सितंबर 2010

चलो! सब संभल कर

दिल्ली हो या बेंगलूरु, कोलकाता हो या चेन्नई या फिर जयपुर या भोपाल। हर तरफ दो ही मुद्दें छाए हैं। पहला अयोध्या मामले के फैसले को लेकर और दूसरा राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन का। देश का ऐसा कोई कोना या कोई व्यक्ति नहीं बचा, जहां और जो इसकी चर्चा ना कर रहा हों। रिहायशी इलाकों से लेकर कच्ची बस्ती तक, इन्हीं मुद्दों पर बतियातें लोग मिलेंगे। अयोध्या मामला तो न्यायपालिका के हवाले हैं, जिसे मानना भारतीयों का कर्तव्य हैं। रही राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन की बात, यह तो वक्त ही बताएगा कि भारत जैसे देश में ऐसे बड़े खेल आयोजन कितने सफल होते हैं? लेकिन एक बात तो साफ है कि अगर अयोध्या मामले के फैसले को सभी ने सहर्ष स्वीकार किया, तो इससे बड़ी खुशी की बात क्या हो सकती है? खेल आयोजन सफल रहा, तो जो देश खेल आयोजन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को नीचा दिखाने में लगे हैं उनका मनोबल भी धराशायी हो जाएगा। साथ ही देश में ऐसे बड़े खेल आयोजनों का रास्ता और खुल जाएगा। खैर, अयोध्या मामले का फैसला 30 सितम्बर को हो जाएगा। लेकिन इस फैसले के आने के बाद आने वाली प्रतिक्रियाओं पर खेल आयोजन पर भी असर पड़ सकता है। सब संभल कर चलो।

2 टिप्‍पणियां:

  1. today i read your blog for the fist time... good and appreciable comment on such sensitive issues. that too two major issues woven together in a praising balance... showing thoughts with maturity... carry on expressing you in a way like this.... well balanced and close to reality... definitely it will lead you to cover a long and rich journalistic journey...

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  2. मुझे तो लगता है कि फैसला अभी और टाल देंगे और कॉमन वेल्थ खत्म होने पर जब भ्रष्ट्राचार का हल्ला मचेगा तो उससे ध्यान भटकाने के लिए न्यायालय का फैसला ला देंगे..तो हल्ला उस पर मचने लगेगा.

    कूट नित तो यही कहती है.

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